Pages

Monday, December 4, 2017

नार्थ कोरिया का ब्यान - अमेरिका का यह कदम परमाणु युद्ध के लिए चुनौती होगा !

नार्थ कोरिया का ब्यान - अमेरिका का यह कदम परमाणु युद्ध के लिए चुनौती होगा !

दोस्तों, उत्‍तर कोरिया ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया के संयुक्‍त सैन्‍य अभ्‍यास की कड़ी निंदा करते हुए परमाणु युद्ध की चेतावनी दी है।
प्‍योंगयांग (उत्‍तर कोरिया)। अमेरिका-दक्षिण कोरिया के संयुक्‍त सैन्‍य अभ्‍यास से भड़के उत्‍तर कोरिया ने परमाणु युद्ध को लेकर चेतावनी दी है। उत्‍तर कोरिया का कहना है कि इस संयुक्‍त सैन्‍य अभ्‍यास के जरिए परमाणु युद्ध को उकसाया जा रहा है।
देश के अखबार रोडोंग सिनमुन के अनुसार, उत्‍तर कोरिया के विदेश मंत्रालय ने कहा पांच दिवसीय सैन्‍य अभ्‍यास से परमाणु युद्ध के शुरू होने की संभावना है। उत्‍तर कोरिया ने डोनाल्‍ड ट्रंप प्रशासन को इसके लिए दोषी ठहराया है । उत्‍तर कोरिया के अनुसार, कोरियाई प्रायद्वीप पर इस तरह से अभ्‍यास करना अमेरिका को महंगा साबित होगा।

पिछले दिनों उत्‍तर कोरिया ने इंटरकांटिनेंटल बैलिस्‍टिक मिसाइल लांच किया था जो जापान के समुद्र में जाकर गिरा था । और  इसके दो दिन बाद ही यह युद्ध  अभ्‍यास सोमवार से शुरू हो रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, F-22 फाइटर जेट समेत 230 एयरक्राफ्ट व 12,000 अमेरिकी सैनिक इस अभ्‍यास में भाग लेंगे।
उत्तर कोरिया ने  कहा है कि दोनों देश नहीं माने तो यह परमाणु युद्ध की शुरूआत हो सकती है। अमेरिका और दक्षिण कोरिया का यह सबसे ब़़डा वायुसैनिक अभ्यास होगा जिसमें 230 अत्याधुनिक लड़ाकू विमान हिस्सा लेंगे। इनमें अमेरिका का अत्याधुनिक एफ-22 रैप्टर स्टील्थ विमान भी शामिल होगा।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एचआर मैकमास्टर का ब्यान
उत्तर कोरिया की यह प्रतिक्रिया अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एचआर मैकमास्टर के उस बयान के बाद आई है जिसमें कहा गया था कि साधनहीन लेकिन परमाणु हथियार संपन्न उत्तर कोरिया से युद्ध का खतरा ब़़ढ रहा है। उन्होंने कहा, यह खतरा दिनोदिन बढ़ता जा रहा है। हम इस समस्या के खात्मे की दिशा में बढ़ते जा रहे हैं। समस्या खत्म करने का एक तरीका युद्ध का भी है, जिसकी आशंका दिनोदिन बढ़ती जा रही है। चार दिसंबर से शुरू होकर आठ दिसंबर तक चलने वाला यह वायुसैनिक अभ्यास उत्तर कोरिया के लंबी दूरी के बैलेस्टिक मिसाइल परीक्षण से छह दिन बाद शुरू हो रहा है। इस बैलेस्टिक मिसाइल से अमेरिकी शहरों पर परमाणु हमला करने की उत्तर कोरिया ने धमकी दी है।
किसी भी क्षण परमाणु युद्ध छिड सकता है
उत्तर कोरिया की सत्तारुढ़ वर्कर्स पार्टी के अखबार रोडोंग सिनमुन ने इस अभ्यास की निंदा की है। कहा है कि यह उत्तर कोरिया को भड़काने की कार्रवाई है। इसके चलते किसी भी क्षण परमाणु युद्ध छिड सकता है। अखबार में कहा गया है कि अमेरिका और दक्षिण कोरिया के नेताओं को समझ लेना चाहिए कि युद्ध भड़कने की स्थिति में उत्तर कोरिया केवल सैन्य ठिकाने पर ही निशाना नहीं लगाएगा बल्कि उसके निशाने पर और भी बहुत सी चीजें होंगी। उल्लेखनीय है कि शनिवार को उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि अमेरिका परमाणु युद्ध पर आमादा है। इसके लिए सहयोगी देशों से भीख मांग रहा है।
गोरतलब है की उत्तर कोरिया समय समय पर परमाणु युद्ध की धमकी देता रहता है लेकिन अन्य देशो को इसे हलके में नहीं लेना चाहिए. क्योकि परमाणु युद्ध का मतलब होगा सम्पूर्ण विनाश.



Sunday, November 26, 2017

2017 धरती का सबसे गर्म साल

2017 धरती का सबसे गर्म साल



दोस्तों , जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणाम की वजह से धरती की तपिश बढ़ने का सिलसिला निरंतर जारी है .
हाल ही में आई अमेरिकी रिपोर्ट के मुताबिक इस साल का पिछला महिना अब तक का चौथा सबसे गर्म अक्टूबर का महिना रहा है और 2017 का वर्ष पिछले 138 सालों का तीसरा सबसे गर्म साल बनने जा रहा है . इस साल तापमान औसत से 1.55 फ़ारेनहाइट ज्यादा है. वहीँ दूसरी तरफ अक्टूबर में तापमान औसत से 1.31 फ़ारेनहाइट ज्यादा है .

अमेरिका के नेशनल ओशनिक एंड एटमोस्फेयरिक एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक पिछला महीना इतिहास का चौथा सबसे गर्म अक्टूबर का महीना रहा है। 2003 के अक्टूबर के महीने में भी इतना ही तापमान था। जबकि 2015 का अक्टूबर सबसे गर्म, 2014 का अक्टूबर दूसरे और 2016 का अक्टूबर तीसरे स्थान पर था। अमेरिकी  रिपोर्ट के मुताबिक अक्टूबर के महीने में ही मौसम गर्मी से सर्दी में तब्दील होता है। इससे तूफान और जलवायु विसंगतियों का असर ज्यादा दिखता है।

उदाहरण के तौर पर, अमेरिका का 12 फीसदी हिस्सा सूखे की चपेट में है। वहीं आर्कटिक में बर्फ औसत से 19.6 फीसदी कम है। अंटार्कटिका में भी बर्फ 2.2 फीसदी कम रही। 1979 के बाद अक्टूबर में इतनी कम बर्फ आर्कटिक में कभी नहीं थी। ऑस्ट्रेलिया और उत्तरी अमेरिका में भी अक्टूबर रिकार्ड गर्म रहा

 साल दर साल  जिस तरह से धरती  आग उगल रही है यह आने वाले समय के लिये खतरे की घंटी साबित हो सकता है और अगर समय रहते सभी देशों ने मिलकर इस संबंध में कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो दुनिया  को इस जलवायुपरिवर्तन की विसंगतियों की वजह से बहुत ही गंभीर नतीजे भुगतने पड़ सकते है .

Popular Posts